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फर्स्ट समाचार/लुधियानाइंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट (आईडीपीडी) ने पोस्ट ग्रेजुएट प्रवेश के लिए एनईईटी (NEET) के लिए कट ऑफ परसेंटाइल को घटाकर शून्य करने के राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के फैसले को गंभीरता से लिया है। पिछले तीन वर्षों में मेडिकल कॉलेजों में लगभग 9700 पीजी सीटें खाली पड़ी हैं। कारण बताया गया है कि ये सीटें एंट्रेंस के लिए कटऑफ के कारण खाली हैं, जो कि केवल 20% थी। यह विवाद सही नहीं है। दरअसल ऊंची फीस संरचना के कारण कई छात्र निजी कॉलेजों में प्रवेश नहीं ले पाते हैं। लेकिन अब उच्च आय वर्ग के छात्रों को योग्यता मानदंडों को पूरा नहीं करने पर भी पीजी सीटें मिलेंगी। यह एक विडम्बना है कि निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लगभग बराबर हो गई है और वे अत्यधिक शुल्क ले रहे हैं। इनमें से कई कॉलेजों का बुनियादी ढांचा खराब है। इस समस्या से निपटने और छात्रों की गुणवत्ता की जांच करने के लिए सरकार ने अंतिम एमबीबीएस परीक्षा में बैठने वाले छात्रों के लिए एग्जिट टेस्ट आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में गुणवत्ता नियंत्रण से अपना पल्ला झाड़ लिया है और सारी जिम्मेदारी छात्रों पर डाल दी है। नये कॉलेजों के बेतहाशा बिना योजनाबद्ध निर्माण को रोका जाना चाहिए और इसके बजाय मौजूदा कॉलेजों में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाना चाहिए। यह जरूरी है कि पोस्ट ग्रेजुएट और अंडर ग्रेजुएट दोनों स्तरों पर मेडिकल कॉलेजों में उच्चतम स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाए। इस फैसले से सीटें भरने के नाम पर गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, इसलिए इसे वापस लिया जाना चाहिए।

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