Thu. Apr 16th, 2026

समाचारवाला/लुधियाना

प्रस्तुति: डॉ शिव कुमार भट्ट

पूज्य पिताश्री के कथनानुसार श्री स्वामी नाथ भगवान् जी की यह मूल प्रार्थना प्राइमरी विद्यालय मालखी के प्रधानाध्यापक तथा क्यूड़ी ग्राम के निवासी श्री बहत्तर सिंह( श्री बोतोर सिंह) जी ने लिखी थी। ये दो भाई थे 71 सिंह और 72 सिंह । ये नाम इसलिए पड़े कि जब इनके पिताजी की उम्र 71 साल की थी तब जिस बालक का जन्म हुआ उनका नाम 71 सिंह पड़ा और जो बाद में जन्मा उसका नाम 72 सिंह (बोतोर सिंह)
पड़ा। कालान्तर में पूज्य पिताश्री के चरणों के आशीर्वाद से कुछ पद्य मैंने रचे तथा कुछ अन्तिम अंश आसपास के गाँव स्वैँरी ग्वाँस आदि के भक्तों के द्वारा रचे हुए थे जिनका मैंने इसमें संपादन किया। पूज्य पिता जी के सान्निध्य में श्री कार्तिकेय संस्कृत विद्यालय भट्टवाड़ी में जो प्रार्थना हम गाते थे वह मूल है।


श्रीस्वामिनाथ जी की प्रार्थना
शरण में आ पड़े स्वामी,
लगा दे पार हे कार्तिक ,

तुम्हारी माँ तो हैं गिरिजा,
पिता हैं शंभू हे स्वामी ।
अनुज हैं श्री विनायक जी,
मयूरासन में है स्वामी ।१।

जगत की ऊँची श्रेणी में ,
बनाया धाम हे कार्तिक !
जिसकी छाया में रह करके
सुखी हैं लोग हैं स्वामी ।२।

चरण से धार द्रोणागिरी
बही है वेग से स्वामी!
जिसके जलपान करने से
होते हैं पार हे कार्तिक !।३।

चरण छूकर सभी बालक
नवाते शीश हे भगवन् !
करो कल्याण हम सबका
सहारा आपका स्वामी।४।

पुराणों में से सारस्वत !
तुम्हारी गाथा हे स्वामी
दैत्यों का नाश करने से
हुए तुम देव सेनानी ।५।

विनय विद्या से पूजित हो
सभी के मन में रहते हो
तुम्हारी छत्रछाया में
सभी सानन्द हैं स्वामी।६।

उठो अब खोल नेत्रन को
विनय भक्तों की सुन लीजे
पुन: अवतार लेकर के
सभी को पार कर लीजे ।७।

हमारे गेह मन्दिर पर
कृपा दृष्टि करो भगवन्!
सुखी संपन्न होकर के
सभी दीर्घायु हों भगवन् ।८।

हमारी पाठशाला की
करो उन्नति हे भगवन्!
गुणी विद्वान् बन कर के
सभी को ज्ञान दें भगवन्।९।

सदा भक्तन के रक्षक हो
यही वर मांगते स्वामी !
हे योगेश्वर! सदा अपने
चरण में स्थान दो कार्तिक!।१०।

हृदय में ज्ञान करुणा का
करो संचार हे स्वामी!
तुम्हारी भक्ति के कारण
सुखी हैं लोग हे कार्तिक! ।११।

भँवर में खा रही चक्कर
हमारे देश की नैया
कृपा करके इसे भगवन् !
किनारे से लगा देना ।१२।

हमारे देश भारत को
मुकुट जग का बना देना
दु:खों से सब छुड़ा करके
सफल भारत बना देना ।१३।

प्रस्तुति: डॉ शिव कुमार भट्ट

ग्राम भटवाड़ी हाल निवास दिल्ली

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