-लुधियाना में पंजाब भर से आए एसोसिएट स्कूलों के संचालकों ने लिया बैठक में हिस्सा


समाचारवाला/लुधियाना
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड एसोसिएट स्कूल संचालकों को परेशान करने के लिए नए-नए फरमान जारी कर रहा है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के फरमानों को स्कूल संघ पंजाब ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी है। बोर्ड ने करीब चार साल पहले एसोसिएशन खत्म करके एसोसिएट स्कूलों को नई शर्तो के आधार पर एफिलिएशन लेने का फरमान जारी किया था जिसके खिलाफ स्कूल संघ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। स्कूल संघ की याचिका पर शिक्षा विभाग ने अब अपना पक्ष पेश किया है। बोर्ड के द्वारा दिए गए जवाब को कोर्ट में काउंटर करने के लिए स्कूल संचालकों ने रविवार को पंजाबी भवन लुधियाना में बैठक कर रणनीति तय की।
बैठक में पंजाब भर से स्कूल संघ पंजाब से जुड़े एसोसिएट स्कूलों के संचालक शामिल हुए। बैठक की शुरुआत स्कूल संघ के वरिष्ठ सदस्यों ने दीप प्रज्ज्वलित करके की। स्कूल संघ के प्रधान जर्नाधन भट्ट ने सभी सदस्यों का स्वागत किया और स्कूल संघ के लीगल एडवाइजर संजीव शर्मा मोहाली ने हाईकोर्ट में चल रहे केसों के बारे में सदस्यों को विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन खत्म किए जाने के केस में पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के माध्यम से शिक्षा विभाग ने अपना पक्ष रख दिया है जबकि कंटीन्युशन वाले केस में भी स्कूल संघ ने अपना पक्ष कोर्ट के सामने रख दिया है।
स्कूल संघ के महासचिव भुवनेश भट्ट ने कहा कि एसोसिएशन खत्म करने के लिए तात्कालिक शिक्षा सचिव ने जो फैसला लिया था वो अपने चहेते पक्ष को फायदा लेने के लिए लिया था। इसके दस्तावेजी प्रमाण स्कूल संघ के पास हैं और उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तात्कालिक शिक्षा सचिव के पास पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन का चार्ज भी था। उन्होंने शिक्षा मंत्री और सरकार को बाइपास करके उक्त आदेश जारी किए। भुवनेश भट्ट सदस्यों के सामने कोर्ट केसों के स्टेटस का विवरण दिया। संजीव शर्मा मोहाली ने कहा कि इस बार बोर्ड ने एसोसिएट स्कूलों से ऑनलाइन कंटीन्युशन परफार्मा भरवाया है उसमें स्कूल संचालकों ने सही डाटा नहीं भरा। इसलिए कोर्ट से यह गुहार लगा दी गई है कि जो भी डाटा स्कूल संचालकों ने इस बार जमा करवाया है उसे कहीं भी पेश करने की अनुमति न दी जाए। बैठक का संचालन राजेश नागर व जसप्रीत सिंह छाबड़ा ने किया। बैठक के अंत में उपप्रधान कमलनयन शर्मा ने सभी का धन्यवाद किया। बैठक में सुनाम से भरत हरि, गुरदासपुर से करमजीत सिंह, शहीद भगत सिंह नगर से राघव भारद्वाज, मोहाली से जगमोहन शर्मा, कमल कौशिक, सुखदेव सिंह, नवांशहर इंदर कुमार , बरनाला से अशोक कुमार वर्मा एवं रणवीर सिंह बरनाला, पातड़ां से जसपाल सिंह, नरेंद्र सिंह, पटियाला से गुरिंदर सिंह ग्रेवाल, तेज कुमार, मंजीत सिंह, नाभा से पवन भल्ला, रविंदर सिंह मान, होशियार पुर से ए के टाट्रा, एच के बक्शी और लुधियाना से सतविंदर सिंह, दलजीत सिंह, राम नाथ, बांके असवाल, शिव कुमार चावला, प्रताप सिंह, राजीव थापर, बलजीत सिंह निर्माण, मनोज शास्त्नी, पवन बमोला, कुलदीप शास्त्नी, संजीव नेगी, गगनदीप कुमार, संजय रतूड़ी आदि उपस्थित रहे।
बोर्ड ने की जीएसटी के नाम पर ओवर चाजिर्ग स्कूल संघ के कैशियर रजिंदर शुक्ला ने बैठक में स्कूल संचालकों से जीएसटी के नाम पर ओवर चाजिर्ग का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने स्कूलों से जीएसटी वसूलने के लिए नोटिस पर नोटिस निकाले लेकिन जब कंटीन्युशन फीस जमा करवाई तो उसमें जीएसटी जीरो है और जीएसटी जितनी राशि स्कूलों से अतिरिक्त वसूली जा रही है। उन्होंने सभी स्कूल संचालकों को कहा है कि इस संबंध में बोर्ड को ईमेल करें और उसकी सीसी मेल स्कूल संघ पंजाब को भी करें ताकि कानूनी लड़ाई के वक्त इसका उपयोग किया जा सके।
सरकार ने आठवीं तक स्कूलों के लिए नियम बनाए और उन्हें पूछा ही नहींस्कूल संघ के मिडिल विंग के कॉर्डिनेटर कमल वर्धन शर्मा ने बताया कि 2020 में पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने एफिलिएटिड स्कूलों के प्रतिनिधियों से बात करके आठवीं कक्षा तक के स्कूलों के लिए नियम तय किए। तब नियम तय करते वक्त आठवीं कक्षा तक के स्कूलों या उनकी पैरवी कर रहे संगठनों को पूछा ही नहीं है। रजनीश शर्मा ने कहा कि बोर्ड से इस संबंध में भी जानकारी ली गई है कि जब यह फैसला लिया गया तब बैठक में कौन-कौन शामिल थे। उन्होंने आठवीं कक्षा तक के ई एफिलिएटिड स्कूलों के संचालकों से अपील की है कि एकजुट होकर इसका विरोध करें।