-गढ़वाल भ्रातृ मंडल के तत्वाधान में उत्तराखंडियों ने किया देवी डोलियों का भव्य स्वागत







प्रियंका भट्ट/लुधियाना
लुधियाना, 20 जनवरी: मां धारी देवी व भगवान नागराजा की देव डोलियां इन दिनों में अपने ‘मैतियों’ को मिलने के लिए (दिवारा यात्र) भ्रमण पर निकली हैं। मां धारी देवी व नागराजा की देव डोलियां के लुधियाना पहुंचने पर गढ़वाल भातृ मंडल के तत्वाधान में समस्त उत्तराखंड़ियों ने उनका भव्य स्वागत किया। डोलियां आचार्य सुरेंद्र प्रसाद सुंदरियाल के दिशा निर्देशन में भ्रमण कर रही हैं। देव डोलियां ढोलेवाल चौक में पहुंची जहां पहाड़ी वाद्य यंत्रों ढोल दमाऊं की थाप के साथ पुष्प वर्षा करके स्वागत किया गया। ढोलेवाल परशुराम मंदिर से प्रभात नगर बद्रीनाथ भवन श्री दुर्गामाता मंदिर तक विशाल शोभायात्र निकाली गई। जिसमें लुधियाना में रहने वाले उत्तराखंड की महिलाओं की 25 से ज्यादा कीर्तन मंडलियों ने भाग लिया। बद्रीनाथ भवन में पहुंचने पर मंडल के पदाधिकारियों ने देव डोलियों व उनके साथ आए हुए लोगों का स्वागत किया। मंदिर पुरोहित कृष्णानंद भट्ट व सुमन चमोली ने देव डोलियों का पूजन किया।
मां धारी देवी व भगवान नागराजा की डोलियों के बद्रीनाथ भवन में प्रवेश करने बाद उपस्थित जनसमुदाय भावुक हो गया। देव डोलियां अपने भक्तों से मिलने उनके बीच पहुंची और सभी को आशीर्वाद दिया। सभा के प्रधान हरी सिंह नेगी, उपप्रधान मनोज शर्मा, महासचिव सैन सिंह भंडारी, कोषाध्यक्ष भोपाल सिंह गोसाईं, सचिव कुलदीप बिष्ट, कोष निरीक्षक नंदन सिंह रावत, माल मंत्री दीन दयाल सिंह, सांस्कृतिक मंत्री बलबीर सिंह, खेल मंत्री दरबान सिंह, उपकोषाध्यक्ष शंकर सिंह रावत, उप कोषनिरीक्षक शिव सिंह रावत, संगठन मंत्री मदन सिंह गोसाईं ने देव डोलियों का पूजन करवाया। मंडल की तरफ से कीर्तन मंडलियों व सहयोगी सामाजिक संस्थाओं का स्वागत किया। रात को महाआरती के बाद उत्तराखंड के क्षेत्रीय देवी देवताओं का आवाह्न् करने के लिए मंडान लगाए गए। आचार्य सुरेंद्र प्रसाद सुंदरियाल ने मां धारी देवी व भगवान नागराजा के महातम्य से सभी को परिचित कराया।
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शहरों में बसे पहाड़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास: आचार्य सुरेंद्र प्रसाद
आचार्य सुरेंद्र प्रसाद सुंदरियाल ने बताया कि पहाड़ में देव डोलियों के दिवारा यात्र की परंपरा है। देव डोलियां अपने क्षेत्र की बेटियों को मिलने उनके ससुराल गांवों में जाकर उनकी कुशलक्षेम पूछती थी और उन्हें मायके आने का न्यौता देती थी। छह-सात महीने की दिवारा यात्र के बाद यज्ञ करवाए जाते थे और बेटियों को विशेष तौर पर आमंत्रित किया जाता था। उन्होंने बताया कि इस देव डोली यात्र से जहां देवता अपने लोगों से मिलने के लिए सदूर शहरों में आ जाते हैं वहीं भक्तों को भी उनके दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हो जाता है। आर्चाय ने कहा कि इस यात्र के जरिए पहाड़ के लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि जो लोग अपने गांव से यहां बसे हैं वो 22 जनवरी को गांव में अपने सगे संबंधियों को फोन करके कहें कि उनके घर के आगे भी एक दिया प्रज्ज्वलित करें ताकि उन घरों के अंदर बंद कुल देवी देवता राम मंदिर की खुशी से वंचित न रहें।
