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-जलवायु परिवर्तन के कारण बरसात के सीजन में पंजाब व हिमाचल में हुई अनियमित बारिश

-जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में फसलों के उत्पादन में आ सकती है कमी

समाचारवाला/ लुधियाना

जलवायु परिवर्तन का असर अब मौसम पर सीधे-सीधे दिखने लगा है। मानसून सीजन में अनियमित बारिश हो रही है जिसके गंभीर परिणाम देखने को मिल रहे हैं। पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के एक शोध में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2023 में अनियमित बारिश ही पंजाब में बाढ़ का कारण बनी है। पीएयू ने पंजाब फ्लड्स-2023 पर रिपोर्ट जारी की है जिसमें उक्त शोध के बारे में विस्तार से बताया गया है। पिछले वर्ष बाढ़ के कारण पंजाब को भारी नुकसान ङोलना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले वर्षो में गंभीर परिणाम सामने आने वाले हैं। 2050 तक पंजाब में मक्का की पैदावार में 13 प्रतिशत, कपास में 11 प्रतिशत व चावल की पैदावार में एक प्रतिशत की कमी आ सकती है। जलवायु परिवर्तन के कारण पंजाब में वर्ष 2000 से ही बारिश में लगातार गिरावट देखी जा रही है। पंजाब में 2023 की बाढ़ के कारणों और प्रभावों को समझने के लिए हाल ही में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना की डॉ. प्रभज्योत कौर, डॉ. संदीप संधू और डॉ. सिमरजीत कौर ने एक अध्ययन किया। पीएयू के इस अध्ययन को क्लीन एयर पंजाब की परिणीता सिंह ने ने स्पष्ट करते हुए कहा कि पिछले साल जुलाई में पंजाब और हिमाचल प्रदेश में अजीबोगरीब बारिश का पैटर्न रहा। पंजाब में 2023 के मानसून सीजन के दौरान सामान्य से लगभग 5 प्रतिशत कम बारिश हुई, लेकिन अकेले जुलाई में सामान्य से 43 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। हिमाचल प्रदेश में भी ऐसा ही पैटर्न देखने को मिला, जहां जुलाई में सामान्य से 75 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। हिमाचल प्रदेश में 7 जुलाई से 11 जुलाई के बीच इन चार दिनों के भीतर सामान्य से 436 प्रतिशत अधिक बारिश हुई थी। जिसकी वजह से पंजाब की तीन प्रमुख नदियों घग्गर, ब्यास और सतलुज में बाढ़ की स्थिति बनी। पटियाला, मोहाली, तरनतारन, गुरदासपुर और फतेहगढ़ साहिब जिलों में घग्गर, ब्यास, सतलुज और रावी नदियों के उफान के कारण सबसे अधिक नुकसान हुआ।बाढ़ के कारण पंजाब में 2.21 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई। इसके अलावा सब्जियों, मक्का, गन्ना और कपास की अन्य फसलें भी पानी के ठहराव के कारण खराब हुई। पशुधन को भी बाढ़ के कारण भारी नुकसान हुआ। शहरी क्षेत्नों में भी बाढ़ के परिणाम सामने आए क्योंकि कई सड़कें और पुल, आवासीय संपित्तयां और बिजली के बुनियादी ढांचे के ढहने से काफी नुकसान हुआ। पीएयू की मौसम विज्ञान की वैज्ञानिक डॉ. प्रभजोत कौर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर मौसम पर पड़ रहा है जिसकी वजह से मानसून सीजन में अनियमित बारिश हो रही है। पीएयू की प्रधान कृषि विज्ञानी डॉ. सिमरजीत कौर ने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन ने पंजाब में 2 लाख हेक्टेयर भूमि को नष्ट कर दिया है। उन्होंने बताया कि किसानों के साथ-साथ विशेषज्ञों के प्रयासों से धान की पनीरी के लंगर लगाए गए जिससे इस नुकसान को टाला गया।

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