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-सच्चाई : 2020 से बोर्ड के अधीन अस्थाई मान्यता के साथ चल रहे हैं 1000 से ज्यादा स्कूल 

-बोर्ड पांचवीं व आठवीं तक के ई-एफिलिएट स्कूलों से हर साल ले रहा है कंटीन्युशन फीस

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के अफसर या तो आरटीआई एक्ट को गंभीरता से नहीं लेते या फिर अफसरों को बोर्ड की गतिविधियों के बारे में ही पता नहीं है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के अफसरों ने एक आरटीआई के जवाब में दावा किया है कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड पांचवीं व आठवीं कक्षा तक के स्कूलों को किसी तरह की मान्यता नहीं देता है। पांचवीं व आठवीं कक्षा तक के स्कूल शिक्षा विभाग की एनओसी पर चलते हैं। जबकि सच्चई यह है कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड 2020 के अधीन पांचवीं व आठवीं कक्षा तक के करीब 1000 से ज्यादा स्कूल सचल रहे हैं। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड इन स्कूलों से ई एफिलिएशन हेड के तहत हर साल कंटीन्युशन फीस भी वसूल रहा है। इसके बावजूद अफसर आरटीआई में सूचना दे रहे हैं कि बोर्ड में पांचवीं व आठवीं स्तर तक मान्यता देने का प्रावधान ही नहीं है।  

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 2011 में पांचवीं व आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं शुरू की और उस समय बोर्ड ने गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को एसोसिएट स्कूल का दर्जा दिया। 2014 में पीएसईबी ने फिर से पांचवीं व आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं  खत्म की। जिसकी वजह से पांचवीं व आठवीं कक्षा तक के करीब 900 एसोसिएट व 400 के करीब एफिलिएटेड स्कूलों की मान्यता स्वत: ही रद्द हो गई। 2019 तक ये स्कूल शिक्षा विभाग से आरटीई की मान्यता यानि एनओसी पर चलते रहे। 2020 में फिर से पांचवीं व आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हुई तो बोर्ड ने 1000 से अधिक स्कूलों को अस्थाई मान्यता(ई-एफिलिएशन) दी। बोर्ड आठवीं तक के स्कूलों से हर साल 8000 रुपये और पांचवीं तक के स्कूलों से 5000 रुपये कंटीन्यूशन फीस लेता है। यही नहीं पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की वेबसाइट पर भी ई एफिलिएशन स्कूल का बाकायदा पोर्टल है। अस्थाई मान्यता देते समय बोर्ड ने कहा था कि इसके लिए नियम तय किए जाएंगे और नियम पूरा करने वालों को स्थाई मान्यता दी जाएगी। लेकिन तब से अब तक कोई नियम नहीं बने और स्कूल हर साल कंटीन्युशन फीस जाम करवाकर चल रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि जब बोर्ड स्कूलों से फीस भी वसूल रहा है और उनके बच्चों की परीक्षाएं, रजिस्ट्रैशन व अन्य सभी गतिविधियां करवा रहा है तो आरटीआई में यह क्यों लिखकर दिया कि बोर्ड आठवीं कक्षा तक के स्कूलों को मान्यता नहीं देता। स्कूल संघ के महासिचव भुवनेश भट्ट ने बताया कि बोर्ड अधिकारियों में आपसी तालमेल ही नहीं है। आरटीआई में गलत सूचना देने के मामले में उनके सदस्य अपील दर्ज करेंगे। 

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