-शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को दिए निर्देश, जारी की गई अस्थाई मान्यता को स्थायी मान्यता माना जाए
-स्कूल संघ पंजाब ने हर साल अस्थाई मान्यता दिए जाने के खिलाफ की थी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर

फर्स्ट समाचार/लुधियाना: राज्य में निजी स्कूलों को अब हर साल शिक्षा विभाग से शिक्षा का अधिकार कानून(आरटीई एक्ट) के तहत स्कूल संचालन के लिए हर साल अस्थायी मान्यता नहीं लेनी पड़ेगी। अब उन सभी निजी स्कूलों को आरटीई एक्ट के तहत स्थायी मान्यता मिलेगी जिनको शिक्षा विभाग आरटीई एक्ट व पंजाब आरटीई रूल्ज 2011 के तहत अस्थायी मान्यता पहले जारी कर चुका है। शिक्षा विभाग ने डायरैक्टर स्कूल शिक्षा (एलीमैंटरी) व सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि जिन स्कूलों को पूर्व में अस्थायी मान्यता मिली हुई है उसे ही स्थायी मान्यता मान लिया जाए। शिक्षा विभाग के इस आदेश के जारी होने से निजी स्कूल संगठनों ने खुशी जताई है।
राज्य में निजी स्कूल चलाने के लिए संचालकों को आरटीई एक्ट व पंजाब आरटीई रूल्ज 2011 के तहत शिक्षा विभाग से अनुमति लेनी होती है। निजी स्कूल संचालक हर साल शिक्षा विभाग के पास आरटीई एक्ट की मान्याता के लिए आवेदन करते हैं। शिक्षा विभाग ने स्कूलों को आरटीई एक्ट के तहत मान्यता देने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारियों को सौंपी थी। ज्यादातर जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी स्कूल संचालकों को अस्थायी मान्यता जारी करते रहे हैं। स्थायी मान्यता न दिए जाने के खिलाफ निजी स्कूलों के संगठन स्कूल संघ पंजाब ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। लंबे समय से याचिका पर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से इस मामले में जवाब मांगा है। 16 दिसंबर को शिक्षा विभाग के अधिकारियों को हाईकोर्ट में जवाब दायर करना है। उससे पहले शिक्षा विभाग ने अस्थायी मान्यता को स्थायी मान्यता में तब्दील करने का आदेश जारी कर दिया। विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों का पालन किया जाए और नियमित तौर पर स्कूलों की जांच करके आरटीई एक्ट के प्रावधानों की पालना करवाई जाए। इससे संबंधित रिपोर्ट भी निर्धारित समय पर विभाग को भेजी जाए।
स्कूल संघ पंजाब के बैनर तले 111 स्कूलों ने लगाई थी याचिका
स्कूल संघ पंजाब के प्रधान जर्नाधन भट्ट, महासचिव भुवनेश भट्ट व सीनियर वाइस प्रधान कमल नयन शर्मा ने बताया कि शिक्षा विभाग हर साल स्कूल संचालकों से अस्थायी मान्यता के लिए आवेदन करवाता था। जबकि आरटीई एक्ट के तहत पहले तीन साल के बाद स्कूलों को स्थायी मान्यता जारी करने का प्रावधान है। लेकिन शिक्षा विभाग 2011 से लगातार स्कूलों को अस्थायी मान्यता दे रहा था। उन्होंने बताया कि इसके खिलाफ विभाग के अफसरों को कई बार मांगपत्र दिए लेकिन विभाग ने मांगपत्रों पर सुनवाई नहीं की। आखिर में स्कूल संघ पंजाब ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। याचिका पर अभी कोर्ट में सुनवाई विचाराधीन है। लेकिन शिक्षा विभाग ने अब स्थायी मान्यता देने का आदेश जारी कर दिया है। उन्होंने बताया कि स्कूल संघ पंजाब के बैनर तले 111 स्कूलों ने कोर्ट में याचिका लगाई थी। कमल नयन शर्मा ने बताया कि शिक्षा विभाग का आदेश जारी होने से स्कूल संचालकों ने राहत की सांस ली है।