–बच्चों को धर्म व संस्कृति से जोड़े रखना जरूर: गुरदेव आनंद अत्री
-गंगा धाम वृद्ध आश्रम में धर्म जागरण समन्वय पंजाब ने मनाई पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी जी की जयंती

फर्स्ट समाचार/लुधियाना
ओम जय जगदीश हरे आरती के रचियता पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी की जयंती के उपलक्ष्य में धर्म जागरण समन्वय पंजाब ने पूरे पंजाब में 24 सितंबर 1 अक्टूबर पूरे प्रदेश में धार्मिक स्थलों पर कार्यक्रम करवाए। पंडित श्रद्धा राम फिल्लौरी की जयंती के उपलक्ष्य में करवाए गए कार्यक्रमों का समापन समारोह गंगा धाम वृद्ध आश्रम लुधियाना में करवाया गया। समारोह में धर्म जागरण समन्वय पंजाब के प्रमुख रामगोपल विशेष वक्ता के तौर पर उपस्थित हुए। समारोह में ओम जय जगदीश हरे आरती का गायन किया और धर्म संरक्षण का संकल्प भी लिया। समारोह में धर्म जागरण समन्वय पंजाब के प्रमुख रामगोपाल ने कहा कि महिलाएं और धार्मिक स्थल धर्मातरण रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्हें जिम्मेदारी के साथ इस काम के लिए आगे आना होगा।
इस दौरान गंगा धाम वृद्ध आश्रम के प्रमुख गुरुदेव आनंद अत्री ने ओम जय जगदीश हरे के रचायिता पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी जी के जीवन पर प्रकाश डाला। गुरुदेव आनंद अत्री जी ने कहा कि आज कल बच्चे अपने धर्म व अपनी संस्कृति को छोड़ पश्चिमी सभ्यता की तरफ जा रहे है। हमें अपने बच्चों को अपने धर्म व अपने संतो के बारे में बताना चाहिए। अपने बच्चों को धर्म के साथ जोड़ें ताकि वह सनातन धर्म का प्रचार कर सकें। वहीं पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी ने धर्मातरण रोकने के लिए एक फॉर्मूला दिया था। उन्होंने कहा कि धर्मातरण रोकने की पहल अपने परिवार से करनी होगी और फिर गली-मोहल्ले, जिले व देश में इस पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि पंडित जी ने कहा था कि घर में महिलाएं अपने बच्चों में सनातन के संस्कार भरेंगी तो वो बच्चे कभी धर्मातरण नहीं कर सकते। रामगोपाल ने कहा कि हमारी माताओं व बहनों को इस काम के लिए आगे आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि परिवार के सभी सदस्य अगर रोज मंदिर नहीं जा सकते तो कम से कम मंगलवार को पूरा परिवार मंदिर जरूर जाए और वहां जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। उन्होंने मंदिर के पुजारियों और मंदिर संचालन करने वाली संस्थाओं से भी कहा कि मंगलवार को मंदिरों में सुंदर कांड का पाठ जरूर करें और बच्चों को मंदिर से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम करवाएं। रामगोपाल ने कहा कि राज्य में बहुत सी धार्मिक संस्थाएं धर्मातरण को रोकने के लिए काम कर रही हैं। इस पर नकेल कसना बेहद जरूरी है। पंडित जी की जयंती को मनाने का सबसे बड़ा कारण भी यही है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में धर्मातरण रोकने के लिए बहुत काम किया है। उन्होंेने कहा कि 180 साल बाद पहली बार पंजाब के सभी जिलों में पंडित जी की जयंती मनाई गई।