
राष्ट्र निर्माण को समर्पित सभी शिक्षक साथियों को उनके समर्पण के लिए शत – शत नमन।
जहाँ संत कबीर ने गुरु को भगवान से पहले चुना, वहीं संत तुलसी दास जी ने भी अपने सृजन “श्री रामचरित मानस” का शुभारम्भ अपने गुरु के चरणों के वंदन से किया।
प्रसिद्ध भारतीय आध्यात्मिक -राजनैतिक -आर्थिक विचारक आचार्य चाणक्य ने तो गुरु के बारे मे कहा है –
शिक्षक कभी भी साधारण नहीं होता. निर्माण और प्रलय दोनों ही शिक्षक की गोद मे पलते हैं।
अतः हम शिक्षक वर्ग पर राष्ट्र निर्माण – स्वस्थ समाज के निर्माण की जिम्मेदारी समाज के अन्य लोगों की तुलना मे ज्यादा है।
अतः चाहे वर्तमान में समाजिक परिवेश – कानूनी परिवेश – राजनैतिक परिवेश में परिस्थितियाँ शिक्षक वर्ग के अनुकूल नहीं हैं, फिर भी हम अपने उत्तरदायित्व से मुख नहीं मोड़ सकते।
समाज – अभिभावक -छात्र चाहे आज शिक्षक को वो मान सम्मान न देता हो जो गुरुकुल परम्परा में था या कुछ हद तक पिछले 15 – 20 साल पहले तक था, पर इससे हमारा /शिक्षकों का उत्तरदायित्व कम नहीं हो जाता। क्योंकि समाज के नैतिक मूल्यों के ह्रास को रोकने और उन्हें पुनः स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य भी शिक्षक वर्ग को ही करना है।
शिक्षा ही वह पूंजी है जो मानवता – संस्कृति -सभ्यता और राष्ट्र की अवधारणा को पोषित करती है और शिक्षा का पोषण – संवर्धन हम शिक्षक वर्ग के हाथों में निहित है।
अतः आओ इस शिक्षक दिवस पर संकल्प लें कि हम अपने हर छात्र -छात्रा में राष्ट्रीयता – मानवता और नैतिकता के प्रति दृढ संकल्प को पोषित करने को हरपल – हरदम तत्पर रहें।
शिक्षक दिवस के अवसर पर मैं अपने हर उस शिक्षक/मार्गदर्शक को सादर-नमन करता हूँ जिन्होंने मुझे ज्ञान रूपी चक्षु प्रदान किए।
परमपिता परमात्मा से प्रार्थना करता हूँ कि आप को आपके कर्तव्यपथ पर सदैव अग्रशील रहने का सामर्थ्य प्रदान करे।
पुनः शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।
🙏
भुवनेश भट्ट
महासचिव
स्कूल संघ पंजाब
