समाचारवाला, चंडीगढ़
कनाडा के ब्रैम्पटन निवासी 62 वर्षीय गुरअमृत सिंह सिद्धू, जिन्हें गिरोह में ‘किंग’ के नाम से जाना जाता था, ने 26 मार्च 2026 को अमेरिकी संघीय अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उन्होंने निरंतर आपराधिक उद्यम (Continuing Criminal Enterprise) चलाने का दोषी करार दिया।
ऑपरेशन डेड हैंड के तहत यह बड़ी कामयाबी है। जनवरी 2024 में शुरू हुए इस अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन में FBI, LAPD, LA IMPACT, RCMP, DEA और मेक्सिको की एजेंसियों ने मिलकर काम किया। ऑपरेशन के दौरान 19 लोगों पर आरोप लगाए गए, जिनमें सिद्धू मुख्य आरोपी थे।
सिद्धू ने सितंबर 2020 से फरवरी 2023 तक अमेरिका से कनाडा में ड्रग्स की तस्करी का पूरा नेटवर्क चलाया। सिर्फ एक महीने (13 सितंबर से 24 अक्टूबर 2022) में उन्होंने 8 बड़ी खेपें भेजीं – कुल 523 किलो मेथाम्फेटामाइन और 347 किलो कोकीन जब्त हुईं, जिनकी अनुमानित कीमत 15 से 17 मिलियन डॉलर (लगभग 17 करोड़ रुपये) थी।
गिरोह की स्ट्रेटेजी: सिद्धू ने अमेरिका (खासकर लॉस एंजेलिस) में मेक्सिकन कार्टेल से ड्रग्स खरीदीं। फिर लंबी दूरी के सेमी-ट्रकों में छिपाकर कनाडा भेजीं। ट्रक ड्राइवरों को ‘टोकन’ दिया जाता था – एक खास फोन नंबर और करेंसी बिल का सीरियल नंबर। डिलीवरी के समय यह टोकन मैच किया जाता था। कनाडा पहुंचने पर सहयोगी ड्रग्स को उठाकर आगे बांटते थे।
जनवरी 2024 में कनाडा में सिद्धू समेत कई आरोपी गिरफ्तार हुए। सिद्धू को अक्टूबर 2024 में अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया। अब तक 7 आरोपी दोषी करार दे चुके हैं। सबसे पहले आयुष शर्मा को 30 महीने की सजा मिली। बाकी को 27 से 108 महीने तक की जेल हुई।
सिद्धू की सजा 9 जुलाई 2026 को सुनाई जाएगी – न्यूनतम 20 साल और अधिकतम उम्रकैद। यह केस होमलैंड सिक्योरिटी टास्क फोर्स का हिस्सा है, जो ट्रांसनेशनल क्रिमिनल संगठनों पर नकेल कस रहा है।

