Site icon समाचारवाला

आरटीओ के कर्मचारियों का कारनामा , डीजल घोटाले को छुपाने के लिए बनवा दी ‘फर्जी रसीदें’


-आरटीआई एक्टिविस्ट की शिकायत पर गृह विभाग ने पुलिस कमिश्नर को जांच के आदेश दिए

समाचारवाला/लुधियाना

रिजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के सैक्रेटरी की कार में डीजल भरवाने को लेकर हुई हेराफेरी का मामला उजागर हुआ तो कर्मचारियों ने उस पर पर्दा डालने के लिए ‘फर्जी रिकार्ड’ तैयार कर दिया। यही नहीं आरटीओ दफ्तर के कर्मचारियों ने तैयार किया गया ‘फर्जी रिकार्ड’ आरटीआई में आरटीआई एक्टिविस्ट को जारी भी कर दिया। खास बात यह है कि जिस समय का कर्मचारियों ने ‘फर्जी रिकार्ड’ आरटीआई एक्टिविस्ट को दिया है उसी वक्त का रिकार्ड वह पहले अकाउंट जनरल पंजाब से आरटीआई के जरिए ले चुका है। दोनों तरफ से मिला रिकार्ड आपस में मेल ही नहीं खा रहा। जिससे साफ है कि आरटीओ दफ्तर ने जो रिकार्ड दिया है वह सीधे तौर पर फर्जी तरीके से तैयार किया गया है।
वर्ष 2021 के तात्कालिक आरटीए सैक्रेटरी की गाड़ी में डीजल डलवाने के जो बिल आरटीए दफ्तर ने खजाना दफ्तर से पास करवाए हैं वही बिल अकाउंट जनरल पंजाब के पास पहुंचे हैं। साफ है कि आरटीआई एक्टिविस्ट को कार में डीजल भरवाने के जो बिल व रसीदें अकाउंट जनरल पंजाब से मिले हैं वो भी आरटीए दफ्तर के तात्कालिक कर्मचारियों ने ही पेश किए थे और आरटीए दफ्तर के अफसरों ने पास किए थे। आरटीआई एक्टिविस्ट अजय शर्मा ने तब आरटीए दफ्तर से इन बिलों की रसीद सूचना अधिकार एक्ट के तहत मांगे थे लेकिन उन्हें यह सूचना नहीं दी गई जिसके बाद उन्होंने अकाउंट जनरल पंजाब के दफ्तर से यह सूचना ली। हाल ही में आरटीआई एक्टिविस्ट ने फिर से आरटीओ दफ्तर(पहले आरटीए दफ्तर था) से सूचना अधिकार के तहत बिल व रसीदों की डिमांड की। अब उन्हें आरटीओ दफ्तर से जो बिल व रसीदें मिली हैं वो पूरी तरह से पुराने बिलों व रसीदों से अलग हैं। अजय शर्मा का कहना है कि यह कैसे हो सकता है कि आरटीओ दफ्तर ने जो बिल खजाना दफ्तर से कैश करवाए हैं वो अलग हैं और अब जो उनके रिकार्ड में हैं वो अलग हैं। दोनों बिल व रसीदें अलग-अलग होने से साफ है कि बाद में फर्जी रसीदें लेकर रिकार्ड तैयार किया गया है।
ये हैं दोनों रिकार्डो में अंतर
एजी दफ्तर से मिली सूचना के मुताबिक आरटीए की कार की लॉग बुक में एक जनवरी 2021 को रसीद संख्या 52732 के तहत 3045 रुपये का 40 लीटर डीजल भरवाया गया। आरटीओ दफ्तर से मिली सूचना के मुताबिक उक्त रसीद संख्या 52732 के तहत एक जनवरी 2020 को 3045 रुपये में 40 लीटर डीजल डलवाया गया। इसी तरह सात अप्रैल 2021 को रसीद नंबर 11272 पर डीजल भरवाया गया और फिर 15 जुलाई को भी इसी रसीद संख्या पर डीजल भरवाया गया। यह कैसे संभव है कि उसी पैट्रोल पंप पर एक साल पहले भी रसीद संख्या वही थी जो कि एक साल बाद है।
एजी दफ्तर से डीजल की जो रसीदें मिली हैं उन पर रसीद संख्या चार अंकों में है जबकि आरटीओ दफ्तर से अब मिली रसीदों की संख्या पांच अंकों में है। जो दोनों रसीदों में कॉमन है वह सिर्फ तिथि, डीजल की मात्र व राशि है। यह भी सवाल है कि यह कैसे संभव है कि एक ही पैट्रोल पंप से एक ही तिथि पर दो अलग-अलग सीरियल नंबर की रसीदें कैसे जारी की गई?
-खजाना दफ्तर ने भी जो डीजल के बिल पास किए हैं उनकी रसीद संख्या भी शक के दायरे में हैं। खजाना दफ्तर से एक अप्रैल 2021 से 18 जुलाई 2021 तक के जो बिल पास करवाए हैं उनकी रसीद संख्या जिनकी रसीद संख्या 8201 से 8222 तक की हैं। 1 सितंबर 2021 से 13 सितंबर 2021 तक भी 8201, 8205, 8209,8212 रसदी संख्या से बिल पाए करवाए गए हैं। इसमें भी सवाल यह है कि एक ही सीरियल नंबर की रसीदें अलग-अलग महीनों में कैसे काटी गई?

मुख्यमंत्री कार्यालय को दी शिकायत तो गृह विभाग करवा रहा है जांच
एजी दफ्तर से मिली रसीदों और आरटीओ दफ्तर से मिली रसीदों में अंतर होने के कारण आरटीआई एक्टिविस्ट ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय को दी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले की जांच गृह विभाग से करवाने को कहा है। गृह सचिव ने पुलिस कमिश्नर लुधियाना को इस मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू भी कर दी।

Exit mobile version